Sunday, May 24, 2020

Corona- fake data

यही लगता है कि आत्मनिर्भर मिलावटी आंकड़े पेश किए जा रहे है - मिलावट हमारे उन प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ आंकड़ों में किया जा रहा है। इतनी अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था है कि मेडिकल कॉलेज में हर जगह पान पीक कर हर कोने की पेंटिंग हुई रहती है और यहां कोरोना में केवल 7 दिन में लोग पॉजिटिव से नेगेटिव हो जा रहे हैं।
#गोलमाल हैं



इतना ही नहीं हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वत: इस मामले पर संज्ञान लेते हुए तल्ख टिप्पणी की कि दिल्ली सरकार को दिल्ली कोरोना ऐप पर लाइव आंकड़े जारी करने चाहिए।
बढ़ते हुए कोरोना के मामलों को देखते हुए जांच और लोगों के परीक्षण में तेज़ी लाने का आदेश जारी किया।
कोरोना के आंकड़ों से छेड़छाड़ करना और आंकड़ों का छुपाया जाना लापरवाही को छुपाना है।
इस संकट और महामारी काल की घड़ी में देश में लगभग 823 लैब में जांच हो रही है। जिनमें से 520 में ही आर टी पीसीआर की जांच और 240 में ट्रुनेट और बाकी 63 में सेबोनेट से जांच हो रही है। यह मशीनें टीबी की जांच में भी कारगर हैं। 
इस समय लगभग रोजाना औसतन सवा लाख सैंपल की जांच की व्यवस्था है, जिसे बढ़ाने की दरकार है। शुद्ध आंकड़े सरकार की बदनामी नहीं अपितु संक्रमण के प्रसार को रोकने में मददगार साबित हो सकते है।


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